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श्री अमरकुमार

राजगृही नगरी के श्रेणिक राजा जब धर्मी न थे, वे चित्रशाला के लिए एक सुन्दर मकान का निर्माण करवा रहे थे।  कोई कारण से उसका दरवाजा बनवाते और टूट जाता था। बार बार ऐसा होने से महाराजा ने वाहन पंडितों और ज्योतिषियों को बुलवाकर इसके बारे में राय मांगी। ब्राह्मण पंडित कोई बत्तीस लक्षण वाले बालक की बलि चड़ने की…

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6 शत्रु और उनकी वजह से हानि ।

1. काम – यहाँ पर काम मतलब, स्त्री के प्रति दुर्भाव… स्त्री के प्रति दुर्भाव का विचार नहीं आना चाहिए । 2. क्रोध – क्रोध से हमारा व्यवहार लोगों को दुखी कर देता है। 3. लोभ – लोभ से दो तरह की भावना आती है, हमारे पास धन होकर भी ज़रूरत मंद को नहीं देना, और दूसरी – किसी और…

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बिटिया बड़ी हो गयी

बिटिया बड़ी हो गयी, एक रोज उसने बड़े सहज भाव में अपने पिता से पूछा – “पापा, क्या मैंने आपको कभी रुलाया” ? पिता ने कहा -“हाँ ” उसने बड़े आश्चर्य से पूछा – “कब” ? पिता ने बताया – ‘उस समय तुम करीब एक साल की थीं, घुटनों पर सरकती थीं। मैंने तुम्हारे सामने पैसे, पेन और खिलौना रख…

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होटल का खाना

रात मैं पत्नी के साथ होटल में रुका था। सुबह दस बजे मैं नाश्ता करने गया। क्योंकि नाश्ता का समय साढ़े दस बजे तक ही होता है, इसलिए होटल वालों ने बताया कि जिसे जो कुछ लेना है, वो साढ़े दस बजे तक ले ले। इसके बाद बुफे बंद कर दिया जाएगा। कोई भी आदमी नाश्ता में क्या और कितना…

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मानव भव का महत्व क्यों है ?

नरक में जिनवाणी सुन नही सकते । तिर्यंच ( पशु , पेड़ आदि ) में जिनवाणी समझ नही सकते । देवगति में जिनवाणी का पालन नही कर सकते । केवल मानव भव ही है जिसमे हम प्रभु की वाणी को सुनकर समझकर आचरण भी कर सकते हैं। मनुष्य भव से ही मोक्ष जा सकते हैं। देवता कभी दीक्षा/संयम स्वीकार नही…

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