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6 शत्रु और उनकी वजह से हानि ।

1. काम – यहाँ पर काम मतलब, स्त्री के प्रति दुर्भाव… स्त्री के प्रति दुर्भाव का विचार नहीं आना चाहिए ।

2. क्रोध – क्रोध से हमारा व्यवहार लोगों को दुखी कर देता है।

3. लोभ – लोभ से दो तरह की भावना आती है, हमारे पास धन होकर भी ज़रूरत मंद को नहीं देना, और दूसरी – किसी और का धन प्राप्त करने की इच्छा होती है ।

4. मान – यह एक ऐसा शत्रु है जिसके आने से हम हमारी भूल को समझते नहीं है

5. मद – नशा ( मैं रूपवान )

6. हर्ष – दुसरो को दुखी कर हर्ष नहीं करना चाहिए, MCX जैसे में कमाकर खुश होना ।

परमात्मा द्वारा दिए गए शासन में हमे यह बताया गया है की हमे उपद्रवो से दूर रहना चाहिए, जहा पर भी उपद्रव हो वह हमे नहीं रहना चाहिए । इससे हमारा कमाया हुआ धन, वैभव सब ख़त्म हो सकता है
परमात्मा का यह कहना है कि हमारा धर्म पुरुषार्थ और धन में संतुलन होना चाहिए, और हमारी 5 इन्द्रियों की ज़रूरत को पूरा करने पर रोक नहीं है, लेकिन ज़रूरतों को पूरा करने में ना ही धर्म पुरुषार्थ पर प्रभाव होना चाहिए, और ना ही धन पर ।
इसीलिए परमात्मा का यह कहना है कि अगर हम उपद्रव वाले स्थान पर रहेंगे तो हमे बहुत ज्यादा नुकसान होने की सम्भावना होती है ।
हमे धर्म और धन दोनों पाने का पुरुषार्थ करना चाहिए, लेकिन दोनों में संतुलन रहना अनिवार्य है।

बिटिया बड़ी हो गयी
January 16, 2017
श्री अमरकुमार
January 17, 2017

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