‘भगवंत । वापस लौटिये, आवश्यक कार्य के लिए प्रयाण करने का होने पर भी , आपके आगमन की प्रतीक्षा में इतना समय विलंब किया है ।
आप महल के द्वार पर पधारे थे , परंतु मेरे परिवार में से किसी ने आपको पहचाना नहीं…. और आप त्वरा से एकदम निकल गये…. वापस पधारिए, प्रभो ।’
अग्निशर्मा ने कहा : ‘महाराजा, मेरी विशिष्ट प्रतिज्ञा आप जानते हो , इसलिए यह बात…. वापस लौटने की बात मत कीजिए….। तपस्वी लोग सचमुच , अपनी ली हुई प्रतिज्ञा के पालन में अडिग रहते हैं । आहार प्राप्त हो या नहीं हो , दोनों स्थिति उनके लिए एक सी होती है ।’
राजा ने कहा : ‘आप ठीक कहते है…. महात्मन , परन्तु मेरी जानकारी के मुताबिक , अपने राजमहल में प्रवेश किया ही नहीं था । राजमहल के मैदान में प्रवेश किया था। आपकी प्रतिज्ञा तो पहले घर में प्रवेश करने पर भी पारणा नहीं हो तो पुनः उस घर में नहीं जाना या अन्य किसी घर में जाकर पारणा नहीं करना वैसी है ना ?’
‘महाराजा , राजमहल के मुख्य दरवाजे में प्रवेश किया यानी महल में ही प्रवेश किया , वैसा कहा जाता है ।’
‘प्रभो, मेरे प्रमाद से मैं बहुत ही शर्मिन्दा हूं । तीव्र तप से आपको कितनी और कैसी भयानक शरीर – पीड़ा हो रही होगी ? भगवंत, सचमुच , उससे भी ज्यादा पीड़ा मैं महसूस कर रहा हूं ।’ राजा की आंखे गीली हो उठी। आंसू उभरने लगे। भर्रायी आवाज में वह बोला :
‘महात्मन, संताप की आग में मैं जल रहा हूं…. मुझे लगता है…. कि मेरा ह्रदय धड़कना बंद हो जाएगा । मेरी जबान लड़खड़ा रही है…. मेरे शब्द हकला रहे हैं…मैं महापापी हूं । मैं क्या करुं ? कहां जाऊं ?’
नगर के विराट प्रवेश द्वार के मध्यभाग में एक आसन पर अग्निशर्मा और दूसरे आसन पर महाराजा गुणसेन बैठे थे । सैनिकों ने रास्ते पर की आवाजाही रोक दी थी । चरों ओर से मंत्रीगण उन्हें घेर कर खड़ा था ।
गुणसेन की प्रार्थना और गुणसेन का पश्चाताप देखकर….सुनकर अग्निशर्मा सोचता है : ‘ओह, यह राजा कितना महान है ? मेरा पारणा नहीं हुआ इसके लिए यह कितना दुःख व्यक्त्त कर रहा है …? अफ़सोस का पार नहीं है इसके। गुरुजनों के प्रति कितनी अपूर्व श्रद्धा और भक्ति है ।
मैंने राजमहल के पटंगण में अनेक हाथी-घोड़े और सैनिकों को देखे थे…. राजा भी शस्त्र सज्ज है, जरुर । यकायक देश पर कोई आफत उतर आई होगी । युद्धयात्रा को जाते हुए राजा से किसी ने कहा होगा …. मेरे आने के समाचार दिये होंगे …. बेचारा …. भागा-भागा आया है…। हालाँकि आज तो मैंने भी दरअसल में जल्दबाजी की वापस लौटने में । पर नहीं लौटता तो और करता भी क्या ? कहीं किसी हाथी-घोड़े के पैरों तले आ गया होता तो ?
आगे अगली पोस्ट मे…