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राजा गुणसेन तपोवन में! – भाग 3

प्रयाण का शुभ दिन आ पहुंचा। चुने हुए सैनिक एवं विशाल परिचारक- परिचारिका-वृन्द के साथ राजपरिवार ने वसंतपुर की और मंगल प्रयाण कर दिया। सात दिन की यात्रा के पश्चात् वसंतपुर के बाहरी उपवन में सभी सानंद आ पहुँचे। वसंतपुर के हजारों प्रजाजन, उनके राजा रानी के दर्शन करने के लिए आतुर थे। उन्होंने वसंतपुर के राजमार्गो को सजाये थे।…

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राजा गुणसेन तपोवन में! – भाग 2

गुणसेन-वसंतासेना के बीच अगाध स्नेह तो था ही, परंतु विशेष रूप से समझदारी एवं सामंजस्य का सेतु बना हुआ था। इसलिए कभी भी गैरसमज होने की संभावना ही नहीं थी। कभी मतभेद हो भी जाता, तो तुरंत ही सच्ची समझदारी से मतभेद को वे मिटा देते, इससे उनका पारिवारिक जीवन शांतिमय और प्रेमभरा हुआ था । एक दिन वसंतसेना ने…

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राजा गुणसेन तपोवन में! – भाग 1

विशाल साम्राज्य के पालन की जिम्मेदारी ने, राजा गुणसेन के यौवनसहज औद्धत्य उन्माद और अविवेक को नामशेष कर दिये थे। प्राज्ञ, प्रौढ़ और अनुभवी मंत्रीयों के सतत संपर्क एवं सानिध्य से राजा गुणसेन भलीभांति परिपक्व हो रहे थे । माता-पिता के अरण्यवास से, अग्निशर्मा के अद्रश्य हो जाने से, पुरोहित एवं उनकी पत्नी की अकाल मृत्यु से, राजा गुणसेन के…

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