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महावीर के सन्यास जिवन

महावीर के सन्यास जिवन मे कई कठीनाईया उनके सामने आई, लेकीन महावीर ने कठीनाईयो का स्वागत कीया और
तप, नियम, कर्म-निर्जरा से वो ज्ञान प्राप्त किया जिसके लिए हर मनुष्य का जन्म हुआ है अर्थात कवल ज्ञान
उनके जिवन के कुछ महान किस्से
1. एक बार भगवान महावीर जंगल मे चलते चलते दोराहे पर पहुचे एक तरफ खडे कुछ लोगो ने महावीर स्वामी से कहा ‘उस रास्ते पर ना जाए वहा चण्डकोशीक नाग रहता है , वो विशाल काय नाग अपनी फुफकार से ही जिवो के प्राण ले लेता है ,आप हमारे साथ इस रास्ते पर चले”

सबके बहोत रोकने पर भी महावीर स्वामी उसी रास्ते पर गए कुछ आगे जा कर वे ध्यान मुद्रा( कायोत्सर्ग) मे खडे हो गए

तभी वो जहरीला विशाल चण्डकोशीक नाग भगवान के पास आया और महावीर स्वामी कै पांव के अंगुठे पर डस लिया ।

लेकीन चण्डकोशीक भी देख कर हैरान हो गया की अंगुठे से खुन की जगह दुध निकल रहा है

ये कोई भगवान की माया नही बल्की उस नाग के प्रती महावीर भगवान की करुणा थी , जिस तरह से बच्चे के जन्म के वक्त करुणा और प्रेम के कारण माँ के सिने का खुन दुध बन जाता है । ठीक उसी तरह,

भगवान महावीर ने आँखे खोली , चण्डकोशीक नाग की तरफ देखते हुए कहा
“जग जाओ चण्डकोशीक, तुम ये क्या कर रहे हो!
हे चण्डकेशीक ना जाने कितने जन्मो से तुम इस क्रोध के अधिन हो अब तुम्हे इस पर विजय प्राप्त करनी होगी”

महावीर की करूणा से चण्डकोशीक भी पिछे हट गया और महावीर वहा से चले गए , कहा जाता है की उस दिन के बाद उस नाग ने किसी को नही काटा ।

2. महावीर का ध्यान भी अटल था , वे मुनि जिवन मे विचरण करते हुए छम्मनी गाव पहुचे और ध्यान मुद्रा मे खडे हो गए

वहा पास ही एक किसान का खेत था किसान ने महावीर से कहा ” मैं जा रहा हूँ, तुम कूछ देर बैलो का ध्यान रखना” और वो चला गया, महावीर तो आत्म ध्यान मे लीन थे कुछ देर बाद किसान लोटा उसने देखा की उसके सारा खेत बैलो ने बर्बाद कर दिया , और बैल भी वहा से कही चले गए ।

किसान महावीर के पास आया ” मेरा बैल कहा है” ?
महावीर स्वामी ने कोई जवाब नही दिया
“क्या तुम बेहरे हो ?? मेरे बैल कहा है??”
ध्यान मे लीन महावीर ने कोई जवाब नही दिया, अब किसान ने अपना आपा खो दिया और दो बडे बडे कीले ले आया

” तुमे कुछ सुनाई नही देता तो ये तुम्हारे कान व्यर्थ है” उसने कहा और दोनो कीलो को महावीर के कानो मे ठोक दिया , कान से खुन टपकने लगा लेकीन महावीर के चेहरे पर एक सिकन नही आया , तब तक उन्होने आँख नही खोली जब तक की उनका ध्यान पुरा ना हो गया

3. महावीर के नियम और व्रत कही ओर देखने को नही मिलते
महावीर स्वामी पाँच महीने पाँच दिन का उपवास कर रहे थे ,
पाँच माह पाँच दिन पुरे हो जाने पर वे गाव की तरफ व्रत तोडने निकले लेकीन व्रत तोडने की उन्होने पाँच शर्ते रखी
उन्हे भोजन देवे वाली कोई राजकुमारी हो
उसका सीर मुण्डा हुआ हो
वो जंजीरो से बंधी हो
उसकी आँखो मे आँसु हो
और भोजन के रुप मे कच्चे उडद हो
वही गाव मे एक सेठ रहता था , उसने कोसाम्बी के राजा से एक नोजवान लडकी को खरीदा ताकी वो घर का काम करवा सके , असल मे वो लडकी चम्पापुरी की राजकुमारी “चन्दनबाला” थी
कोसाम्बी के राजा ने , चम्पापुरी पर हमला कीया और उनकी सुन्दर राजकुमारी को केद कर लाया , राजकुमारी को एक सेठ को बेच दिया लेकीन चन्दनबाला के आदर और साफ चरीत्र के कारण सेठ ने उसे बेटी की तरह रखा , सेठ की पत्नि चन्दनबाला की सुन्दरता से बहोत जलती थी , एक दिन सेठ घर नही था तो उसकी पत्नी ने चन्दनबाला के सुन्दर बाल काट दिए , उसे जंजीरो मे बाँध और घर से बाहर चली गई

तब ही भगवान महावीर वहा आए
” ये साधु मेरे घर से भुखा नही लोटना चाहीए” ये सोच कर चन्दनबाला ने भोजन ढुंढा पर जंजिरो के कारण वो जादा नही ढुंढ पाई , उसे अद्पके उडद मिले , उडद लेकर वो महावीर के पास आई ।

महावीर की पाँच शर्तो मे हर शर्त पुरी थी पर चन्दनबाला की आँखो मे आँसु नही थे ये देख कर महावीर वहा से जाने लगे
और चन्दन बाला अपने दुर्भाग्य के कारण रो पडी
महावीर की पाँचो शर्त पुरी होने के बाद पाँच महीने पाँच दिन बाद अपना व्रत तोडा ।

वासक्षेप क्या है एवं यह क्यों दिया जाता है ?
November 11, 2016
पिता
November 12, 2016

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