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बंदिश का नाम जैन धर्म नहीं है पर दया भाव का नाम जैन धर्म है

आज आपको कोई त्याग करने के लिए बोल दिया जाता है,तो आपको वह बंधन लगने लगता है,आप पहले ही सोच लेते हो की नहीं हो पाएगा मुझसे!

अरे ये त्याग बंधन नहीं है,

ये नियम,पचखान आपके मन को डोरी से बाँध देते हैं,फिर आपका मन भटकता नहीं!
उदाहरण:

जैसे की आपको जलेबी अच्छी लगती है,उसको खाने के लिए आप कुछ भी कर सकते हो,यदि आप इसका त्याग करोगे तो आपका मन धीरे-धीरे शांत होगा,शरीर भी स्वस्थ रहेगा,और आपका मोह भी अन्य वस्तुओं पर से घटेगा,और मोह घटेगा तो आपकी आत्मा भी इन कर्मों से छुटकारा जल्द ही पालेगी और अनंत सुख-शान्ति जो आपकी आत्मा में ही है उसे पायेगी!

सबसे पहले उस चीज़ का त्याग करो जो आपको सबसे ज़्यादा पसंद है,और उस नियम का मज़बूती से पालन करो!
प्रयास करते रहो,आप कर सकते हैं!
धीरे-धीरे मोड़ तु इस मन को,
इस मन को,हाँ,इस मन को

महावीर जैसा बनने की कोशिश मत करो,आपकी आत्मा है ही महावीर के जैसी ये विचार करो

कोई आपको देने नहीं आएगा मोक्ष,
“मोक्ष तो आप में ही है”

हर रोज़ करें

नित्य अपने पास वाले जैन धर्म स्थान पर जाना,
गुरुओं की वाणी सुनना,
प्रवचन में सुनाई गई बातों को अपने जीवन में उतारना,
औरों को भी धर्म की बातें सिखाना!

“जय जय जिनवानी नमो नमो
आत्मा की कहानी नमो नमो!”

“आनंद जिसकी तुम्हें तलाश है,वह तुम्हारे अंदर ही है”

ज्ञान
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