घास और बांस दोनों के बड़े होने का समय अलग अलग है दोनों का उद्देश्य अलग अलग है।
*तुम्हारा भी समय आएगा। तुम भी एक दिन बांस के पेड़ की तरह आसमान छुओगे।* मैंने हिम्मत नहीं हारी, तुम भी मत हारो !
व्यापारी की आँखों में आँसू थे।अपने मित्र की बात उसे समझ आ चुकी थी।मित्र को गले लगाया और लौट आया अपने घर।
पुनः मेहनत की और बहुत कम समय में ही अपने व्यापार को शिखर तक पँहुचा ही दिया।
आईये आज की शुभारम्भ करें संघर्ष के समय हिम्मत न हारने के संकल्प के साथ…..
आप की आरोग्यता एवम प्रसन्नता की कामना के साथ…..
