राजा देवशकति का एक ही पुञ था उसके पेट मे एक साप रहता था। इस कारण वह हमेशा बिमार रहता था अनेक वैधानिक की फिर भी वह स्वस्थ नही हुआ निराश होकर एक दिन घर छोड़कर चुपके से निकल गया । वह भटकता हुआ किसी दुसरे राज्य मे आ पहोचा । वह भिक्षा मंगा कर पेट भर लेता और मंदिर मे सो जाता । उस राज्य के राजा का नाम बलि था। उसकी दो पुञिया थी । बलि अपनी छोटी पुञी से नाराज रहता था । एक दिन कोध मे आकर उसने छोटी बेटी का विवाह मंदिर मे रहने वाले उसी भिखारी राजकुमार से कर दिया । वह पति को साथ लेकर दूसरे राज्य चली गई।
वहाँ उसने सरोवर किनारे पर बसेरा बना लिया । एक दिन राजकुमारी अपने पति को छोङकर भोजन का सामान लेने स्वयं नगर मे चली गई। राजकुमार सो गया इस बिच उसके पेट मे रहने वाले साप उसके मुख से बाहर आया । पास हि की बाबी मे रहने वाला साप भी बाहर आया । उसने पेट मे रहने वाले साप को फटकारते हुए कहाँ – तू बहुत दुष्ट है जो साप सुंदर राजकुमार को पीड़ित कर रहा है।
पेट मे रहने वाले साप ने कहा – ” और तू कौन -सा भला है । तुने अपने बाबी मे सोने के दो दो कलश छुपा रखे है । बांबी वाले साप ने कहा – ” क्या कोइ नही जानता की राजकुमार को पुरानी राई कि कांजी पिलाई जाए तो तू तुरंत मर जाएगा ” पेट मे रहने वाले सांप ने भी उ सका भेद खोल दिया-” तुम्हारेी बांबी मे खौलता तेल या पानी डाल कर तुम्हें भी मारा जा सकता है ” राजकुमारी लौट आई थी उसने दोनो सांपों की बात सुन ली । उसने बताए हुए उपाय से उन दोनो सांपों का नाश कर दिया । पेट वाले साप के मरते ही राजकुमार स्वस्थ हो गया । फिर बांबी मे गङे धन को लेकर अपने राज्य मे अा गई और अपने पति के साथ सुख से रहने लगी ।
