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तनाव (डिप्रेशन)

डिप्रेशन को हिन्दी भाषा में ‘अवसा’ कहते हैं। यह एक मानसिक विकार है। यह विकार किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकता है। विज्ञान की दृष्टि में मस्तिष्क के रसायनों के असंतुलन के कारण अवसाद होता है। डिप्रेशन से ग्रस्त मरीज़ लम्बे समय तक उदास, दुखी और तनाव महसूस करता है। ऐसी अवस्था में उसकी जीवन में दिलचस्पी कम हो जाती है, उसको नेगटिव फ़ीलिंग्स घेर लेती हैं, और वह कोई भी काम ठीक से नहीं कर पाता है।

अक्सर देखा गया है की पुरुषों की तुलना में महिलाएँ अवसाद से ज़्यादा प्रभावित होती हैं। इसकी वजह से पर्सनल और प्रोफ़ेशनल लाइफ़ दोनों पर बुरा असर पड़ता है। और इसके अलावा इस बीमारी से मूड, लाइफ़स्टाइल और सोचने-समझने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। अगर इस विकार को समझने में देर हो जाए तो लाइफ़ मुश्किल में पड़ जाती है।

कई मामलो मे देखा गया है की महिलाओ के डिप्रेशन मे जाने हेतु पुरुष याने पति जिम्मेदार ही होता है। दरअसल एक के बाद एक महिलाओ पर टार्चर या उसकी कोई कदर नही या उसे सिर्फ घर की चाहरदिवारी तक रखना आदि भी महिलाओ के तनाव के कारण होते है ।

तनाव मे जी रहा इंसान कैसे जाने:
●अक्सर उदास या परेशान रहता हो
●बातों-बातों में खुद को अक्सर कोसता हो।
●खुद को बेबस महसूस करता हो
●खूब सोता हो या बिल्कुल नींद न आती हो
●घर मे किसी से बात नही करना
●अकेले कमरे मे लाईट बन्द करके रहना
●बिल्कुल कम खाता हो या बहुत ज्यादा खाता हो
●उसका वजन अचानक बढ़ रहा हो या तेजी से कम हो रहा हो
●खुशी के मौकों को इग्नोर करता हो
● सिरदर्द और बदन दर्द की शिकायत लगातार करता हो
●चिढ़कर या झल्लाकर जवाब देता हो
●बार बार आत्महत्या की धमकी देना ।
तो आप समझें कि उसे आपके साथ और डॉक्टर के इलाज की जरूरत है। ऐसे समय में उससे चिढ़े नहीं, बीमार समझकर उसका साथ दें। उससे जी भरकर बात करें। उसकी हरकतों पर नजर जरूर रखें।

एक इंसान तनाव मे कई कारणों से आता है, जिसमे दोस्तों, प्यार, परिवार की मुख्य भूमिका होती है ।

कुछ कारण जो तनाव की जिंदगी देते है-
– प्रियजन से बिछड़ना (मसलन ब्रेकअप, किसी की मौत या तलाक)
– नौकरी छूटना या पैसे-जायदाद का नुकसान
– रिटायरमेंट के बाद खुद को बेकार समझना
– किसी कड़े मुकाबले में हार जाना
– मेहनत के बाद भी उम्मीद के मुताबिक नतीजा न मिलना
– कर्ज बढ़ जाना और उसे चुकाने का जरिया न होना
– भविष्य के प्रति अनिश्चितता
– किसी बड़ी बीमारी या मौत का खौफ आदि।

हम जिंदगी की अहमियतता नही समझते , जो मिला उसका सुख नही लेते, पर जो नही मिला,जो चला गया,जो बिछुड़ गया उसका दुःख जरूर पालते है ,और तनाव की जिंदगी मे जीते रहते है ।

आप एक बात ध्यान रखे की आप अकेले ही संसार मे नही हो जो इस तरह के शिकार हुए , हर इंसान की एक समस्या है, आपकी समस्या से बढ़े दुःख जीवन मे है और वो बेहतर जिंदगी जी रहे है, तो फिर आप निराश क्यों हो ।

उठो, बन्द कमरे से निकलो, बाहर का नजारा देखिये, एक बार फिर से मस्ती की जिंदगी जीयो, भूल जाओ की जीवन मे कांटे थे, अब उस कांटे की जगह गुलाब आ गए और वो मुस्कुरा कर आपका रास्ता देख रहे है। प्रकृति कितना मुस्कुरा कर आपकी राह देख रही है ,और एक आप हो जो निराश, निढाल और अनमने मन से तनाव और बेकार जिंदगी जी रहे हो।।

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