दिन की कहानी
Archivers
मनुष्य प्रभु की अनुपम कृति,,,,,,,
एक बार एक गरीब किसान एक अमीर साहूकार के पास आया, और उससे बोला कि आप अपना एक खेत एक साल के लिए मुझे उधार दे दीजिये। मैं उसमें मेहनत से काम करुँगा, और अपने खाने के लिए अन्न उगाऊंगा। अमीर साहूकार बहुत ही दयालु व्यक्ति था। उसने किसान को अपना एक खेत दे दिया, और उसकी मदद के लिए…
भगवंत की दयामृत दृष्टि से सिंचित -चंडकौशिक सर्प-
साधू था बड़ा तपस्वी, धरता था मन में वैराग्य। शिष्यों पर क्रोध किया, बना चंडकौशिक नाग।। पाठकों को प्रश्न होगा कि महानुभाव की कथा में सर्प की कथा आई कैसे? मूल कथा हैं एक वृद्ध साधू की, लेकिन इसका नाम साधू के तीसरे भव का याने मर कर सर्प होता हैं तब के नाम से कथा का नाम ‘चंडकौशिक सर्प’…
प्रभु वीर की वाणी का असर -रोहिणीयो चोर- पर
राजगृही के नजदीक वैभवगिरी गुफा में लोह्खुर नमक भयंकर चोर रहता था। लोगों पर पिशाच की तरह उपद्रव करता था। नगर में धन भण्डार और महल लूंटता था। लंपट होने के कारन परस्त्री का उपभोग भी करता था। रोहिणी नामक स्त्री से उसे रोहिणेह नामक पुत्र हुआ। वह भी पिता की तरह भयंकर था। मृत्तु – समय नजदीक देखकर लोह्खुर…
मेगकुमार
महावीर प्रभु राजगृही नगरी पधारे। महाराज श्रेणिक, अभयकुमार, धारणी देवी वगैरह ने भगवान की देशना सुनी, श्रेणिक महाराजा ने संकित का आश्रयकिया और अभयकुमार श्रावक धर्म अंगीकारकिया। देशना के अंत में प्रभु को प्रणाम करके परिवार के साथ वे राजभवन पधारे। तब उनके एक पुत्र मेघ्कुमार ने भक्तिपूर्वक हाथ जोड़कर प्रार्थना की, ‘ श्री वीरप्रभु जो भव्य लोकों से संसार…
सनतकुमार चक्रवर्ती
कुरु देश के गजपुर नगर में सनतकुमार राज्य करते थे। उन्होंने सर्व राजा-रजवाड़ों को वश करके चक्रवर्ती पड़ प्राप्त किया था। वे खूब स्वरूपवान थे। उनके जैसा सुन्दर रूप धरती पर किसी का न था। इंद्रा महाराजा ने देवों की सभा में सनतकुमार के र्रोप की प्रशंसा की। इंद्रा महाराजा की वाणी सुनकर दो देवों को शंका हुई। खेद पाकर…
