एक व्यापारी अपने व्यापार के ठप्प हो जाने से बहुत परेशान था।
परिवारजनों ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन व्यापारी पर कोई असर नहीं हुआ।
बल्कि पूरी तरह अवसाद ग्रस्त हो गया।अब वह बात बे बात परिवाजनों पर गुस्सा करने लगा था।कभी कभी तो आत्महत्या की बातें करने लगा था।
परिवारवालों ने शहर के नामी मनोचिकित्सक से उसका इलाज करवाया।।
किन्तु…
*मर्ज बढ़ता गया…….*
*ज्यों ज्यों दवा की।*
एक दिन उसका एक मित्र उससे मिलने उसके घर पँहुचा।
घरवालों ने उसे पूरी घटना बताते हुए मदद की मांग की।
मित्र व्यापारी को अपने फार्म हाऊस में ले गया।फार्म हाऊस में एक तरफ हरी और नरम घास से युक्त बगीचा था तो दूसरी तरफ बाँस के ऊँचे ऊँचे पेड़ थे।
मित्र बोला, ‘ घास और बांस के पेड़ को देखो! जब मैंने घास और इस बांस के बीजों को लगाया,मैंने इन दोनों की ही बहुत अच्छे से देखभाल की। इनको बराबर पानी दिया, बराबर खाद दी।
घास बहुत जल्दी बड़ी होने लगी और इसने धरती को हरा भरा कर दिया लेकिन बांस का बीज बड़ा नहीं हुआ। लेकिन मैंने बांस के लिए अपनी हिम्मत नहीं हारी।
दूसरे वर्ष, घास और घनी हो गयी उस में झाड़ियाँ भी आने लगी लेकिन बांस के बीज में कोई वृद्धि नहीं हुई। लेकिन मैंने फिर भी बांस के बीज के लिए हिम्मत नहीं हारी।
तीसरे वर्ष भी बांस के बीज में कोई वृद्धि नहीं हुई, लेकिन मित्र मैंने फिर भी हिम्मत नहीं हारी।
चौथा वर्ष भी ऐसे ही बीत गया लेकिन बांस के बीज में कोई वृद्धि नहीं हुई लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी।
आखिर पांच साल बाद, उस बांस के बीज से छोटा सा पौधा अंकुरित हुआ…घास की तुलना में ये बहुत छोटा और कमजोर था लेकिन केवल 6 महीने बाद ये छोटा सा पौधा 100 फ़ीट लम्बा हो गया।
अब सोचो मैंने इस बांस को उगाने के लिए पांच साल का समय लगाया। इन पांच सालों में इसकी जड़ इतनी मजबूत हो गयी कि 100 फिट से ऊँचे बांस को संभाल सके।
इसलिए मित्र!समझो, जीवन में *जब भी तुम्हें संघर्ष करना पड़े तो घबराना मत। समझना! तुम्हारी जड़ मजबूत हो रही है। तुम्हारा संघर्ष तुम्हे मजबूत बना रहा है जिससे कि तुम आने वाले कल को सबसे बेहतरीन बना सको*।
