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क्षितिप्रतिष्टित नगर में – भाग 2

अग्निशर्मा के कठोर वचन सुनकर कुलपति का दिल आहत हो उठा।यह तपस्वी जरूर उग्र कषायों से घिर गया लगता हैं।इसका चित्त कषायों के कीचड़ से कलुषित हो उठा हैं।इस समय राजा गुणसेन को इसके पास दर्शनार्थ नही आने देना चाहिए। उसे वही से विदाई देना-यही उचित है। यदि यह तपस्वी राजा को देखेगा तो ज्वालामुखी की भांति फट पड़ेगा। होश गवाकर अग्निशर्मा अश्र्वया शब्द बोलेगा। राजा का कोमल दिल टुकड़े -टुकड़े हो जाएगा। राजा का ह्रदय जल जाएगा। तापसकुमार को लेकर कुलपति आर्य कौडिन्य जिस ओर से राजा सपरिवार आ रहा था उस दिशा मे पचास कदम चले। कुलपति ने उदास और उदिग्न राजा को परिवार के साथ पैदल चलता हुआ आते देखा।कुलपति का दिल कसक उठा। राजा ने सपरिवार, कुलपति को विनय से प्रणाम किये। कुलपति ने सभी को आशीर्वाद दिये। परिवार सहित नत्मस्तक हो राजा दो हाथ जोड़कर खड़ा रहा मोन विवाद और आँसू से वातावरण बोझिल हो उठा। कुलपति ने सहानुभूति से कहा राजन, इस तरफ आओ हम चंपक वृक्षो की घटा मे बैठे। राजा ने भरी-भरी आवाज में कहा जैसी आपकी आज्ञा। कुलपति ने पीछे राजा सपरिवार चंपक वृक्षो की घटा में गया। वहां पर एक स्वच्छ शिला पर मुनिकुमार ने दर्भासन रखा। कुलपति उस पर असिन हुए। मुनिकुमार कुलपति के पीछे जाकर खड़े रहे।राजा और पूरा परिवार कुलपति के समक्ष विनयपूर्वक बैठा। कुलपति बोले राजन,परिवार के साथ इस तरह पैदल चलकर इतनी दूर आने का अनुचित कार्य क्यों किया ?राजा ने कातर स्वर में कहा: पूज्य, हम तो अनुचित कार्य करने वाले ही है। प्रमाद से महानतपस्वी को मरणात् कष्ट देकर मैने अधम कृत्य किया है। उस महात्मा को धर्मान्तराय करने का महापाप किया है। वत्स, संताप न कर भवितव्यता बलवती है।

भगवंत, अब तो में आपके आश्वाशन पाने के लिए भी योग्य नही रहा हूं। मैं तो उन महातपस्वी अग्निशर्मा के दर्शन करके निर्मल होने के लिए यहाँ आया हूँ। वे महातपस्वी कहा पर विराजमान है ?राजन, इतना खेद मत करो। उस तपस्वी ने तुम्हारे प्रति द्वेष के कारण अनशन नही किया है। यह तो तपस्विजनो का आचार है कि’ आयुष्य के अंतिम समय में अनशन कर के देह का त्याग करना। प्रभो, ये सारी बाते आप मुझे शान्ति देने के लिए कर रहे हैं। मै वास्तविकता से परिचित हुँ।इसलिए निरर्थक बाते नही करनी है। मुझे झूठा आश्वासन नही चाहिए मुझे तो उन महात्मा के पास जाना है आप कृपा करें।

आगे अगली पोस्ट मे…

क्षितिप्रतिष्टित नगर में – भाग 1
April 10, 2018
क्षितिप्रतिष्टित नगर में – भाग 3
April 10, 2018

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