Archivers

पारणा नहीं हो सका। – भाग 5

अग्निशर्मा ने तपोवन में प्रवेश किया । क्लान्त, क्षमित, व्यथित और मुरझाए हुए चेहरेवाले अग्निशर्मा को देखकर तपोवन के तापस उसके इर्दगिर्द एकत्र हो गये। एक तापस ने चिंतातुर स्वर में पूछा : ‘भगवंत , क्या आपका पारणा नहीं हुआ ?’ ‘दूसरे तापस ने पूछा : ‘आप पारणा किये बगैर के मुरझाये हुए शरीरवाले क्यों दिख रहे हैं ?’ तीसरे…

Read More
पारणा नहीं हो सका। – भाग 4

हमेशा की भांति , सूर्योदय होने पर महातपस्वी अग्निशर्मा कुलपति की अनुज्ञा लेकर , पारणे के लिए राजमहल की ओर आने के लिए निकला । नीची निगाहे और आहिस्ता – आहिस्ता चलते हुए उसने नगर में प्रवेश किया । नगर के राजमार्ग पर शून्यता और उदासी का साया छाया हुआ था । उसे देखकर सिर झुकानेवाले , अहोभाव से अभिनंदन…

Read More
पारणा नहीं हो सका। – भाग 3

‘अब मुझ से यह वेदना सही नहीं जाती ।’ महाराजा ने धीमे स्वर में वसंतसेना से कहा । रानी ने वहां पर खड़े हुए चारों मंत्रियों से कहा : ‘महानुभाव , महाराजा की शिरोवेदना असह बनती जा रही है । कुछ उपाय कीजिए ।’ शोकग्रस्त बने हुए विचक्षण मंत्री तुरंत ही शयनखंड से बाहर निकले । यशोधन , ने कहा…

Read More
पारणा नहीं हो सका। – भाग 2

रानी ने समीप के खंड में सोई हुई…. परिचारिकाओं को जगायी। परिचारिकाएं महाराजा के कमरे में आई एवं महारानी की आज्ञा के लिए प्रतीक्षारत होकर खड़ी रही । ‘महाराजा को भयंकर शिरोवेदना हो रही है। वेगराज को बुलाने के लिए प्रतिहारी गये हैं । तुम यहीं पर खड़ी रहो । वेगराज अायेंगे , महाराजा के रोग का निदान करेंगे ,…

Read More
पारणा नहीं हो सका। – भाग 1

मनुष्य चाहे जितनी इच्छाएं करे…. योजनाएं बनाये…. और अभिलाषाएं रखें , उसकी कई इच्छाएं निष्फल जाती हैं म। कई तरह की योजनाएं अधूरी रह जाती हैं, और अभिलाषाएं मन में ही रह जाती है। तब मनुष्य निष्फलताओं से निराश हो जाता है । व्यथा एवं वेदना से घिर जाता है। ‘कल सबेरे… इस पश्चिम महाविदेह क्षेत्र के अद्वितीय तपस्वी अपने…

Read More

Archivers