_【 च्यवन ( गर्भ ) – कल्याणक 】 _
_गर्भ कल्याणक में_
_संस्कारों का होगा शंखनाद_
_आदि प्रभु के आगमन से_
_मन होगा आवाद_
_मरुदेवी के ह्रदय में_
_गूँज उठी झनकार_
_पंचकल्याणक में भक्ति करके_
_करलो आत्मा का उद्धार।_
_【 जन्म-कल्याणक 】_
_जन्म कल्याणक में होंगे प्रभु_
_पाण्डुक शिला पर विराजमान_
_देव भी हर्षित होंगे सारे_
_झूमेगा खुशिओं से आसमान_
_इंद्र भी नाचेंगे और_
_सजेगा सौधर्म का दरबार_
_पंचकल्याणक में भक्ति करके_
_करो आत्मा का उद्धार_
_【 दीक्षा ( तप ) – कल्याणक 】_
_तप की अग्नि में तपोगे तो_
_सोने सा निखार आएगा_
_तप कल्याणक में संयम से_
_आत्मबल बढ़ जाएगा_
_जो पथ चुना भगवन ने_
_करो उसे स्वीकार_
_पंचकल्याणक में भक्ति करके_
_करो आत्मा का उद्धार।_
_【 केवलज्ञान – कल्याणक 】_
_केवल ज्ञान कल्याणक में_
_ज्ञान की धारा बहेगी_
_आपके भीतर है भगवान_
_ये आपसे कहेगी_
_आप भी हो जाना_
_भगवान बनने को तैयार_
_पंचकल्याणक में भक्ति करके_
_करो आत्मा का उद्धार।_
_【 मोक्ष – कल्याणक 】_
_मोक्ष कल्याणक से होगा_
_मोक्ष मार्ग प्रशस्त_
_आप भी हो जाना_
_आत्मचिंतन में व्यस्त_
_जाओ ऐंसे कि फिर न_
_आना पड़े बार बार_
_पंचकल्याणक में भक्ति करके_
_करो आत्मा का उद्धार।_
