भक्ति क्या है – इस संसार में रहते हुए संसार की समस्त बुराइयों से खुद को बचते हुए ईश्वर तक पहुँचने की कोशिश ही भक्ति है। भक्ति करने की विधि किसी प्रकार की हो इससे भगवान को कोई फर्क नही पड़ता केवल अंदर मन की भावना सच्ची होनी चाहिये। भावना का भाव ही भगवान तक पहुँचाने में सक्षम है। भगवान का सच्चा भक्त्त बनने के लिए हमें भी ईश्वर के आचरण को अपने जीवन में अमल करने की कोशिश करनी चाहिए, यही के प्रति हमारा सच्चा समर्पण होगा।
मानवता का संबध -: ईश्वर और मानव के संबधो का उल्लेख कवि रैदास द्वारा निम्न प्रकार से किया गया है।
“हे प्रभु यदि आप चंदन हो , हम पानी है ”
पानी के साथ चंदन घिस जाता है और उसकी सुगंध चारो ओर फेल जती है।
प्रभु जी यदि आप मेघ वाले बादल है , तो हम मोर पक्षी, चकोर पक्षी की तरह चाँद को देखते है।
प्रभु जी आप दीपक हो , तो हम उस दीपक की बाती जो निरंतर जलती रहती है।
प्रभु जी यदि आप मोती हो , तो हम उस मोती के धागे जिसमें मोती को डाला जाता है अर्थात – : ” सोने ” और ” सुहागा ” जैसी हमारी और आपकी जोड़ी है।
प्रभु जी यदि आप स्वामी है तो हम दास इस प्रकार की मै भक्ति कर रहा हूँ।
