होमवर्क हम करेंगे या होमवर्क करने के लिए हम उसकी मदद करेंगे
उसको गाइड करेंगे?
अगर हम चाहते है कि बच्चा आगे बढ़े, कुछ सीखे, अपनी जिम्मेवारी को समजे तो हम होमवर्क कर नही देंगे? उसको हेल्प करेंगे,
गाइड करेंगे -राइट ??
होमवर्क करना किसको है ? बच्चे को ही!!
अगर किसी दिन बच्चा बिना होमवर्क किये ही स्कुल चला गया और टीचर ने उसको थोडा punish कर दिया,
तो क्या हम पेरेंट स्कुल जा कर बच्चे को पनिशमेंट से बचा सकते है?
क्या हमें ऐसा करना चाहिए ??
ऐसा करने से नुकसान तो बच्चे का ही हो रहा है ना ??
ठीक वैसे ही,
हम जो भी कर्म मनसा, वाचा,कर्मणा मन से(thoughts), वाणी से (speak) या कुछ कर के (action)
उसका फल सिर्फ और सिर्फ हमे ही भुगतना पड़ता है!!
जैसे ही हंमारे ऊपर कोई मुसीबत आती है हम भगवान को कहेंगे
-भगवान मेरी प्रॉब्लम सॉल्व कर दो हम सोचते है,
भगवान ने आखिर मेरे साथ ऐसा क्यूँ किया?
जब की मैने तो कभी किसी के साथ कुछ बुरा नही किया
किसी को कुछ बुरा नही कहा
फिर भी मेरे साथ ऐसा क्यूँ हो रहा है ???
ऐसे समय पर हमें, जरा रुक करे खुद को चेक करना है
कि क्या मैने कभी किसी के लिए बुरा किया नही, बुरा कहा भी नही लेकिन क्या बुरा सोचा भी नही है ?? शुद्ध और पवित्र कर्म तभी बनेगा जब हमारे words, action और thoughts! तीनो एक ही दिशा में रहेंगे
जो भी होता है वो सब हमारे कर्म के अनुसार ही चलता है!
अब हमें ये सोचना है कि इन सबमे भगवान का रोल क्या है ??
जैसे as a parent. हमे बच्चे को होमवर्क करने में उसकी मदद करनी है,
उसको गाइड करना है,
ठीक इसी तरह भगवान हमे गाइड करता है
करना तो हमे ही है, वो आकर हमारे बदले कुछ नही करेगा
जब कर्म का सिद्धांत समज में आ जाता है तो ,
“मेरे साथ ही ऐसा क्यूँ हुआ?
“ऐसा कोई सवाल आएगा ही न…
