दिन की कहानी
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श्री अवंति सुकुमाल
मालवा देश कि उज्जैन नगरी में पिता धन सेठ एवं माता भद्रा सेठानी कि कोख से अवंति सुकुमाल का जन्म हुआ। उन्होंने पूर्व जन्म में नालिनीगुल्म विमान के स्वर्गीय सुख भोगकर यहाँ जन्म पाया था। अति सुख और वैभव वे भोग रहे थे। रम्भा जैसी बत्तीस नारियाँ से शादी कि थी। इस उज्जयनी नगरी में मुनि श्री आर्य सुहास्तिजी बड़े…
अईमुत्ता मुनि
राजगृही नगरी में गौतम स्वामी गोचरी के लिए निकले हैं। खलते हुए बालक अईमुत्ता ने मुनि को देखा और बाल भाव से मुनि को पूछा कि ऐसी दुपहरी में नंगे पाँव क्यों गुम रहे हो? गौतम स्वामी राजकुमार अईमुत्ता को समझाते हैं, हम शुद्ध, दूषण बिना की भिक्षा घर घर लेते हैं। हमारे आचार अनुसार, पाँव में जूते पहिनते नहीं…
अनाठी मुनि
एक मुनि… अनाथी जिसका नाम… बन में एक पेड़ के निचे ध्यानस्थ खड़े हैं। वहाँ मगध राज श्रेणिक अपनेरसाले के साथ क्रीडा करने पधारते हैं और मुनि को देखकर चकित हो जाते हैं। मुनि की कंचनवर्णी काया, सुन्दर मुख और गुणशालिनी तरुण अवस्था देखकर मुनि को पूछते हैं, अरे मुनि, यह वेष क्यों धरा हैं? इस युवा उम्र को क्यों…
अरनिक मुनि
अरनिक ! भद्र माता का एवं पिता का एकलौता पुत्र। माता एवं पिता लम्बे अरसे से दीक्षा भाव सेवन कर रहे हैं, लेकिन नन्हें अरनिक को कौन संभाले? एक दिन भगवान कि वाणी सुनकरतुरंत निर्णय लिया। माता-पिता दोनों ने दीक्षा ले ली तथा पिता मुनि ने अरनिक को भी दीक्षा दी। बाल मुनि विध्याभ्यास करते हैं,लेकिन उनका सब व्यावहारिक कार्य…
मेतारज मुनि
भगवान महावीर का चौमासा राजगृही नगरी में था। राजा श्रेणिक, उनकी रानियाँ, पुत्र और नगरजन के सारे वासी प्रभु कि देशना सुन रहे थे। श्रेष्ठी श्री मेतार्य को देशना सुनकर वैराग्यभाव जाग उठा। वैराग्य चरितार्थ के लिया भगवान से प्रार्थना की। संसारी सगे-रिश्तेदरों एवं श्रेणिक राजा मेतार्य को समझाते हैं- यह वैभव, नौ-नौ नारियाँ छोड़कर दुष्कर पथ पर क्यों जा…
