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हादसा दोहराया फिर। – भाग 4

राजा गुणसेन अंतःपुर में रानी वसंतपुर के पास गया । ‘देवी, अभी – इसी वक़्त मुझे युद्ध यात्रा के लिए प्रयाण करना होगा । राजा मानभंग ने हमारी सोयी हुई सेना का भयंकर संहार कर डाला है ।’ राजा शस्त्रसज्ज हुआ । रानी वसंतपुर ने राजा के मस्तक पर विजय का तिलक किया । राजमहल के विशाल पटंगण में हस्तिसेना…

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हादसा दोहराया फिर। – भाग 3

‘जल्दी, दरवाजा खोला , महाराजा से शीघ्र ही मिलना जरुरी है ।’ द्वारपाल ने दरवाजा खोल दिया । दो घुड़सवार घोड़े पर से नीचे उतर गये । घोड़े द्वारपाल को सौंप दिये । आनन फानन में दौड़ते हुए राजमहल में प्रविष्ट हुए । शयनखंड की परिचारिका ने खंड में प्रवेश करके राजा से कहा : ‘महाराजा , युद्धयात्रा में गये…

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हादसा दोहराया फिर। – भाग 2

— राजा गुणसेन रानी वसंतसेना के साथ रथ में आरुढ़ होकर नगर में पहुँचे । राजमहल में जाकर आनंद प्रमोद में निमग्न हुए । —- ज्ञान — ध्यान में निमग्न योगी पुरुषों को समय का खयाल रहता नहीं है । रंग राग में निमग्न रहनेवाले भोगी पुरुषों को भी समय का खयाल कहां रहता है ? बरसों के बरस बीत…

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हादसा दोहराया फिर। – भाग 1

अपने पास में खड़े वुद्ध-प्रशांत तापस से कुलपति ने कहा : जाओ , उस महानुभाव अग्निशर्मा को बुला लाओ ।’ वुद्ध तापस ने अग्निशर्मा के पास जाकर , उसका अभिवादन कर के कहा : ‘महानुभाव, आपको कुलपति याद करते हैं ।’ अग्निशर्मा अपने आसन पर से खड़ा हुआ और वुद्ध तापस के साथ कुलपति के पास आया । कुलपति ने…

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