आज हम 21 वी सदी मे जीवन यापन कर रहे है । हमारी अपेक्षाए निरन्तर बढ रही है । हम हमारी संस्कृति से विमुख हो गये है । हम धर्म को तो भूल ही रहे होंगे परन्तु हमारी संस्कृति ने जो संबंध हमे दिये है जिस पर हमारे जीवन का आधार है जिस पर कई सुंदर कल्पना की सृष्टि हम लोगो ने रची है यह सब कुछ संबंधो की देन है। हम आज बात करेंगे गृहस्थ आचरण का एक संबंध ” दाम्पत्य ”
आज की पीढ़ी के दिमाग मे दाम्पत्य की क्या परिभाषा है? उसके लिए दाम्पत्य Agreement है । दाम्पत्य वो सौदा है अगर आपकी भी यही सोच हो तो सावधान ….
” दाम्पत्य वो कोई करार नही।
दाम्पत्य वो पवित्र संस्कार है ।”
दाम्पत्य जीवन वो प्रेम की अखण्ड आराधना है
स्नेह की साधना है
दाम्पत्य जीवन वो प्रेम और वफादारी की है
दाम्पत्य जीवन वो स्नेह की तरी है।
दाम्पत्य जीवन वो साध लेने का और साथ देने का खेल है
दाम्पत्य कभी सहनशीलता का तो कभी चारित्रशीलता का मेल है।
दाम्पत्य मे आकर्षण भी है तो घर्षण भी दाम्पत्य यानि • मोतिया उतरी हुई ऑंख से पति के लिए बनायी हुई रसोई है तो
टूटी हुई कमर से पत्नि के हाथ मे से सबजी की थैली लेने की जल्दबाजी है ।
दाम्पत्य है तभी हमारा नाथ है
दाम्पत्य बिना हम सब अनाथ है ।
दाम्पत्य प्रेम है,रहेम है और सुखी जीवन का नेम है। दाम्पत्य यानि रसोडे मे से आता झांझर की मीठी-2 झणकार है ड्राईंग रूम मे से झांझर के झणकार को मिलती ताल है।
दाम्पत्य जीवन का सच्चा प्रवास है, दाम्पत्य जिंदगी की श्वासोश्वास है। दाम्पत्य है तो सुख – दुःख है। दाम्पत्य है तो ईमली जैसे खट्टे जीवन को मीठे
आम मे कन्वर्ट करदे वो है दाम्पत्य जीवन है।
दाम्पत्य पत्नि का मंगलसूत्र है तो दाम्पत्य वो पति का प्रेम सूत्र है। दाम्पत्य गृहस्थ जीवन का सार है।
दाम्पत्य जीवन यानि दो श्वासो का एक प्रवास है। दाम्पत्य दो जिंदगी की एक श्वास है ।
दाम्पत्य जीवन का सच्चा स्वरूप पति पत्नी को एक मे एक मिलना पडेगा। पानी मे जैसे बर्फ पिघलती है वैसे ही स्वयं के साथी के जीवन मे पिघल जाए उसी का नाम दाम्पत्य जीवन है वही दाम्पत्य का मर्म समझ सकता है। बहुत सारे लोग साथी के जीवन पानी मे फैकाते कंकर की तरह बन जाते है जो खुद तो पानी मे डूब जाते है और पानी भी उडता है।
दाम्पत्य जीवन मे जितना त्याग होता है उतनी तृप्ति मिलती है। आप जब उसमे खो जाते हो तभी सही जीवन मिलता है। जब आप आत्मियता बताते हो तब आपको प्रसन्नता मिलती है । तुम्हारा समर्पण ही जीवन का सही अर्पण है। समर्पण ही दाम्पत्य जीवन की चाबी है।
दाम्पत्य दो जनो का एक प्रवास है। दाम्पत्य दो व्यक्तियो की एक जीवन कथा है। दाम्पत्य की मधुरता दो मे से एक होने मे है। दाम्पत्य एक दूसरे को गमते और नमते रहने का नाम है। दाम्पत्य एक दूसरे की कदर करने का नाम है। जो निभाना आए तो दाम्पत्य घर की चार दिवारो के बीच मे चार धाम है ।
” झगडो कि हवारा लग्न को निष्फल बनाने के बजाय खुद झगड़े को निष्फल बनाने मे दाम्पत्य का परम श्रेय रहा है । “