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इच्छा क्या होती है ?

एक छात्र को अलग-अलग विषयों पर ज्ञान हासिल करने का बड़ा शौक था। उसने प्रकाण्ड विद्वान सुकरात का नाम सुन रखा था। ज्ञान की लालसा में एक दिन वह सुकरात के पास पहुंच ही गया और सुकरता से पूछा कि वह कैसे उसकी तरह प्रकाण्ड पंडित बन सकता है।

सुकरात बहुत कम बात करते थे। छात्र को यह बात बोलकर बताने के बजाए उसे वे समुद्र तट पर ले गए। समुद्र तट पर पहुंच कर वे बिना अपने कपड़े उतारे समुद्र के पानी में उतर गए।

छात्र ने समझा कि यह भी ज्ञान प्राप्ति का कोई तरीका है, अतः वह भी सुकरात के पीछे पीछे कपड़ों सहित समुद्र के गहरे पानी में उतर पड़ा। अब सुकरात पलटे और छात्र के सिर को पानी में बलपूर्वक डुबा दिया। छात्र को लगा कि यह कुछ बपतिस्मा जैसा करिश्मा हो जिसमें ज्ञान स्वयमेव प्राप्त हो जाता हो। उसने प्रसन्नता पूर्वक अपना सिर पानी में डाल लिया, परंतु एकाध मिनट बाद जब उस छात्र को सांस लेने में समस्या हुई तो उसने अपना पूरा जोर लगाकर सुकरात का हाथ हटाया और अपना सिर पानी से बाहर कर लिया।

हांफते हुए और गुस्से से उसने सुकरात से कहा – ये क्या कर रहे थे आप ? आपने तो मुझे मार ही डाला था!

जवाब में सुकरात ने विनम्रता पूर्वक छात्र से पूछा – जब तुम्हारा सिर पानी के भीतर था तो सबसे ज्यादा जरूरी वह क्या चीज थी जो तुम चाहते थे?

छात्र ने उसी गुस्से में कहा – सांस लेना चाहता था और क्या!

सुकरात ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया – जिस तहर से तुम पानी के भीतर सांस लेने के लिए जीवटता दिखा रहे थे, वैसी ही जीवटता जिस दिन तुम ज्ञान प्राप्ति के लिए अपने भीतर पैदा कर लोगे, तो समझना कि तुम्हें ज्ञान की प्राप्ति हो गई है।

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