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विचारों को अपने जीवन में परिवर्तन करना | Voice Of Jains | Page 3

विचारों को अपने जीवन में परिवर्तन करना

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सजा सुधारने के लिए पाठशाला होनी चाहिये।

सजा सुधारने के लिए पाठशाला होनी चाहिये।….. सजा पाप का परिणाम है। गुनाह का गंभीर परिणाम है। सजा नरक की खदान है। तो कभी दानव को मानव भी बना देती है। सजा दुर्गुणों को दबाने की क्रिया है, तो सजा दुर्गुणों को पैदा करने की प्रक्रिया भी है। सजा असंस्कार के प्रवाह को रोकने की प्रक्रिया भी है। तो सजा…

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विश्व में फैली महामारी कोरोना

विश्व में फैली महामारी कोरोना बचने का उपाय भारतीय परम्परा….. दुनिया भयभीत है। हर मानव अपनी जान बचाने के लिये भाग रहा है। चीन से ब्रिटेन तक तो इटली से अमेरिका तक सभी जगह महामारी के आतंकी सांचे में मानव जीवन। दुनिया तकनीकी को छोड़कर अपना रही है, भारतीय पद्धति। हमारे यहां शुरुआत से ही अतिथि सत्कार नमस्कार से होता…

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ऐसी छूट धर्म ने नहीं दी

सभा: दूसरे धर्मों की तुलना में हमारे धर्म में परिवेश की मर्यादा में इतनी छूट कैसे मिली? छूट किसने दी? हमारे धर्म ने ऐसी कोई छूट नहीं दी है। यह छूट तो आपने खुद ही ले रखी है। हम अक्सर पूरे दबाव पूर्वक कहते हैं, लेकिन आप हमारी कहां सुनते हो? आपको याद नहीं होगा कि इसी वालकेश्वर-चंदनबाला में 7-8…

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औचित्य माता पिता का – भाग 23

आपका कृत्य, संतानों के लिए आदर्श है: यहां धर्म स्थान में, प्रवचन में आओ तब आपके माता-पिता को भी साथ में लाएंगे? उनका हाथ तुम स्वयं ही पकड़ो यह अच्छा है कि तुम्हारा आदमी पकड़े वह अच्छा। आपके घर की महिलाएं माता का हाथ पकड़े। आपकी पत्नी को यह काम सौंपो। आप पिताजी का हाथ पकड़कर लाओ। व्यख्यान में आओ…

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औचित्य माता पिता का – भाग 22

हक का पागलपन नहीं चल सकता: सभा: पुत्र का अधिकार नहीं? सब माता-पिता का है, वह दे तो ही लेना चाहिए। वे न तो नहीं लेना चाहिए। दुनियादारी की रीत से भले ही हक लगता हो, किंतु धर्म की दृष्टि से कोई हक नहीं लगता। रामचंद्रजी का दशरथ महाराजा की गद्दी पर अधिकार था कि नहीं? बड़े पुत्र थे, पिता…

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