Archivers

एक कानखजूरा

एक कानखजूरा था उसके 64 पैर थे एक दिन एक हाथी उसकी तरफ आ रहा था कनखजूरा घबरा गया, उसको लगा की अब वह हाथी के पैर के नीचे आकर मर जाएगा, ऐसा सोचकर वह भागने के लिए सोचने लगा, और भागने के लिए तैयार हुआ लेकिन वह वहां से हट नहीं रहा था वहां से भाग नहीं रहा था। उसके 64 पैर में से कौन सा पैर पहले उठाऊं उसकी ऐसी विचार करने में वह वही अटका रहा, वह कोई निर्णय नहीं ले सका कि किस तरह यहां से भाग सकूं, और वह उल्टे विचार करने लगा कि यदि मैं भागा तो भी हाथी तो मेरे पास आ ही जाएगा, मेरे पैर तो बहुत छोटे हैं, हाथी के पैर तो बड़े-बड़े हैं। ऐसे उसके पास 64 पैर की शक्तियां थी लेकिन एक भी शक्ति का उपयोग नहीं कर सका, और हाथी नजदीक आ गया, और हाथी के पैर के नीचे वह कुचला गया।

उसके पास इतने सारे पैर होते हुए भी वह उनका उपयोग नहीं कर सका। कारण एक ही है कि वह उसकी शक्ति का उपयोग में नहीं लाया। इंसानों का भी ऐसा ही है, इंसान के पास शक्तियां बहुत है। लेकिन उसको स्वयं की शक्तियों का भान नहीं रहता कोई भी गति या प्रगति के लिए इंसान सक्षम है। लेकिन उसे पैर को आगे बढ़ाना ही नहीं है। या फिर कभी डर के कारण घबराकर वह पैर आगे बढ़ा नहीं सकता।

प्रगति करनी हो तो हमें स्वयं के अंदर की शक्तियों का भरपूर उपयोग करना पड़ता है, प्रगति करनी हो तो हमें हमारी तमाम शक्तियों को बाहर लाना पड़ेगा, और प्रगति के शिखर पर विजयध्वज लेहराना पड़ेगा।

Discourse-to-heart-change
प्रवचन से ह्रदय-परिवर्तन
January 17, 2020
स्टोरी ऑफ एडिशन
June 30, 2020

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Archivers