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श्रावकशिरोमणि दलीचंद्रभाई का विश्वविक्रम
A-world-record-of-Shravakshiromani-Dalichandrabhai

गांव के युवको सहित सभी जैन उस श्राध्दरत्न को पा कर अत्यंत प्रसन्न है । अनेक साधु महाराज भी उस श्राद्धरत्न की धर्मचर्या जान बार-बार उसकी प्रशंसा किए बिना नहीं रह सकते। दलीचंदभाई की अनेकविध आराधना:- पिछले चालीस वर्षों से व्यापार का त्याग, जूतों का त्याग । पैतालीस वर्ष पहले उन्होंने बारह व्रत ग्रहण किए। नित्य रात को ग्यारह बजे…

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शेठ की जयणा
Seth-ki-jayan

खंभात के नगरशेठ बहुत धर्मप्रेमी थे । पाप से बचने के लिए पूजा से पहले स्नान परात में करते और बाद में पानी रेत में डाल देते! नौकर ने सेठजी से कहा कि सेठजी ! लाईये, में डाल दूं । तो सेठजी ने कहा कि अरे भाई! यह तो जयणा का काम है। वह तो मैं ही करूंगा !!! इसी…

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प्रतिज्ञा की मक्कमता
Viability-of-pledge

ढवाण के वीरपाल गांधी । सानंद में रहकर 51 उपवास की घोर तपस्या की । आखिरी दिन में मुसीबत हो गई। तबियत बिगड़ने लगी। लोगों ने सलाह दी कि आज ही पारणा कर लीजिए। बाद में आलोचना कर लेना। लेकिन वीरपाल ने दृढ़ता से तप चालू रखा!!! उसी ही दिन उनकी सद्गति हुई । धन्य हो तपप्रेमी को।

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कॉलेजियन का अहिंसा प्रेम
Collegian's-love-of-non-violence

मुंबई की वह लड़की कॉलेज में पढ़ती थी। वनस्पति में जीवो का ज्ञान होने के बाद हिंसा से बचने के लिए भोजन में केले ही खाती! घर के लिए भी भाजी खरीदते वक्त केले ही लाती! क्योंकि कच्चे केले में बीज नहीं होने से पुरे केले का एक ही जीव होता है। बाद में युवती ने वैराग्य बढ़ने पर दीक्षा…

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धंधे से निवृत्ति
Retirement

मुंबई इरला के देवचंद्रभाई श्रावक को प्रवचन सुनते- सुनते धर्म की रुचि पैदा हुई ।आराधना करने लगे। 4-5 साल बाद मैंने व्यवसाय को छोड़ने की प्रेरणा दी। देवचंद्रभाई को बात जच गई। मेहनत की और कुछ ही समय में निवृत हो गए!आज भी शासन जयवंत है कि ऐसा कठिन काम भी किसी न किसी जैन हिम्मत से करते हैं! वैसे…

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