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कथा योशोदा कि व्यथा नारी की भाग 17

यशोदा: स्वामिन् ! आप मुझे स्वल्प भी याद मत करना ! आपकी साधना में मेरा स्मरण, मेरा विचार आप कदापि मत करना ! आपको तो विश्व के सर्वजीवो के तारणहार बनना है! मेरे जेसी सामान्य स्त्री के लिए आप आपका एक भी समय बिगाड़ना मत! और हा! प्रिया की चिंता भी मत करना ! में कभी भी उसे दुःखी होने नहीं दूँगी ! आपके अवकाश को पूरा करना तो मेरे लिए अशक्य है , तो भी आपको याद करकर दुःखी हो जाए वैसी पलो को मै कभी नहीं आने दूँगी, यह मेरा आपको वचन है !

ओ नाथ ! मै जानती हूँ कि आपको ऐसी कोई चिंता नहीं है ! तो भी मै मेरा ह्र्दय खाली कर रही हूँ! इच्छा तो थी कि “में भी आपके साथ जंगलो में चली आऊँ” परन्तु मेरा अस्तित्व आपकी साधना में खलेल पहुँचाने वाला बनेगा! और ऐसे भी मै आपके जितनी सत्वशालिनी नहीं हूँ!

“माँ”…… शयनखण्ड के द्वार पर प्रियदर्शना आकर खड़ी थी ! यशोदा की नजर उसकी और गई! “प्रिया! यहाँ आ!” प्रियदर्शना दौड़ते दौड़ते यशोदा के पास आ पहुँची! “प्रिया ! तेरे बापूजी अभी जा रहे है! अभी वे कभी भी वापस आने वाले नहीं है! उनके पैर पड़कर आशीर्वाद मांग ले की वो जभी तीर्थंकर बनकर तीर्थ की स्थापना करेगे, तभी तूुझे और तेरी माँ को जल्दी बुला ले !”-बोलते बोलते यशोदा फिर से श्रावण भादरवा बरसाने लगी !

छोटी सी प्रियदर्शन बहुत समजू और गंभीर थी !

“बापूजी ! आप मेरी चिंता मत करना , मैें माँ के साथ अच्छी तरह से रहूँगी ! आपके बिना में नहीं रोऊँगी !माँ रोएगी तो भी अटकाऊंगी ! जाओ बापूजी! निचे हजारो लोग आपकी राह देख रहे है ! मात्र मुझे आशिष देना कि मै भी आपके मार्ग पर आ सकू !”

और महावैरागी वर्धमान ने प्रियदर्शना और यशोदा के सिर पर हाथ रखकर विदाय ली ! स्वामी के वरघोड़े को निहारने के लिए यशोदा प्रिया को लेकर विशाल झरोखे में पहुँची! राजमार्ग की और द्रष्टि रखकर खड़ी रही ! थोडी ही देर में वहाँ से वर्धमान की शिबिका पसार होते हुए दिखाई दी! अहो! देवलोक के अधिपति इन्द्रो आज अदकेरे सेवक बनकर वह शिबिका ( पालखी ) उठाने का काम कर रहे थे ! सम्पूर्ण राजमार्ग हजारो लोगो से भरचक हो गया ! पेैेरो की ऐडी पर उचे हो होकर हजारो लोग वर्धमान के मुखारविंद को निहारने की कोशिश कर रहे थे ! अनेक स्त्रीया घरो की छत , ओटले पर पहुँचकर वर्धमान को देख रही थी स्वामी के इस ऐश्रर्य को देख रही थी !स्वामी के इस ऐश्वर्य को देखकर यशोदा गदगद हो गई |

आगे कल की पोस्ट मे पडे…

कथा योशोदा कि व्यथा नारी की भाग 16
February 2, 2017
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February 8, 2017

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