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शोध – प्रतिशोध पाठ 4 – भाग 1 to 10 | Categories | Voice Of Jains

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राजकुमार का पश्चाताप – भाग 10

माँ और पुत्र दोनो पलंग पर बैठे । माँ ने कहा ‘वत्स, इस महीने मे वसंतसेना के साथ तेरी शादी तय कर दी है ।’ वसंतसेना जो कि अंगनपुर की राजकुमारी थी, उसके साथ गुणसेन कि सगाई-मंगनी पहले ही हो चुकी थी । ‘फिर, दूसरी बात ?’ गुणसेन ने पूछा । ‘इसके बाद जो अच्छा मुहूर्त आये… उस दिन तेरा…

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राजकुमार का पश्चाताप – भाग 9

कुमुदिनी मौन रही । ‘तुम कुमार से बात कर लेना ।’महाराजा ने कहा । ‘कौंन सी बात ?’ ‘उसकी शादी की, उसके राज्यभिषेक की और अपने गृहत्याग की ।’ ‘मै बात करूंगी…. पर वह नहीं मानेगा तो ?’ ‘तुम मना सकोगी ।’ ‘नही मानेगा तो आपके पास भेज दूंगी ।’ दोंनो खामोश हो गये । ‘एक बात पूंछू ?’ कुमुदिनी…

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राजकुमार का पश्चाताप – भाग 8

तीसरे दिन की रात थी । महाराजा पूर्णचन्द्र रानिवास में गये । रानी कुमुदिनी ने मौनरूप से स्वागत किया । महाराजा सिंहासन पर बैठे । कुमुदिनी उनके चरणों के पास बैठी । कुछ क्षण विश्राम लेकर महाराजा ने कहा ‘: ‘देवी, मेरी इच्छा है कि इस महीने कुमार की शादी कर दें ।’ रानी ने राजा के सामने देखा ।…

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राजकुमार का पश्चाताप – भाग 7

गुणसेन ने करुण रुदन करते हुए कहा : मेरे ये मित्र निर्दोष है…. मैने ही उन्हें गलत रास्ते पर चलने को मजबुर किया है । इसलिए इनकी सजा भी मुझे ही कि जाए । सख्त से सख्त सजा कीजिए मुझे, पिताजी !’ कोई कुछ बोलता नही है…। सभी की आंखे आंसू बहा रही थी । पिताजी… गुणसेन ने महाराजा के…

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राजकुमार का पश्चाताप – भाग 6

‘क्षमा कीजिये, महाराजा… सजा मत दीजिए….। बावरी सी हुई रानी कुमुदिनी सभाखण्ड में आई और महाराजा के चरणों में आई और महाराजा के चरणों में लेट गई । ‘देवी, जैसे तुम्हे तुम्हारा पुत्र प्रिय है, वैसे अग्निशर्मा की मां को भी उसका पुत्र प्रिय होगा ना ? वह मां भी बरसों से रोती-कलपती होगी । तुमने कभी तुम्हारे लाडले को,…

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