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शोध – प्रतिशोध पाठ 1 – भाग 1 to 10 | Categories | Voice Of Jains

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किसी का मजा, किसी को सजा – भाग 10

अग्निशर्मा चिल्ला चिल्लाकर बोला। परंतु खेल तमाशा देखनेवालों को दया कहां थी ? लोग तालियां पीट पीट कर हंसने लगे । कुष्णकांत को गुस्सा आया। उसने अग्निशर्मा को कुँए के किनारे पर ही पटका…. अग्निशर्मा चीख उठा ।’ गुणसेन ने कहा : ‘इधर ला, इस पठ्ठे को मुझे दे, जरा मैं भी इसको मजा चखाऊं…।’ कुष्णकांत ने अग्निशर्मा को कुमार…

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किसी का मजा, किसी को सजा – भाग 9

आंसू भरी हुई आंखों से पुरोहित ने उस प्रौढ़ व्यक्त्ति के सामने देखा और कहा : ‘ भाई , हमारे खाने-पीने की बात तो करना ही मत। महीनों से हमारा खाना-पीना हराम हो गया है। न तो खाना अच्छा लगता है… न पीना मन को भाता है । शाम को वे दुष्ट लोग… अग्नि को घर में डाल जाएंगे। फिर…

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किसी का मजा, किसी को सजा – भाग 8

यज्ञदत्त ने कहा : ‘भाईयों, आप या महाजन, महाराजा के पास मत जाइये,मैं और अग्नि की माँ-हम दोनों जाएँगे। चाहे तो राजकुमार हमारे गले पर तलवार का वार कर दे । वैसे भी, जीने में रखा क्या है ? बेटे का दुःख अब देखा नहीं जाता। हमारे लिए तो जिन्दगी और मौत दोनों ही एक से हैं। हम जाएँगे महाराजा…

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किसी का मजा, किसी को सजा – भाग 7

अग्नि बेचारा घबराहट के मारे रो रो कर जार जार हुआ जा रहा है…। पर राजकुमार खुश होकर झूम रहा है । उसके साथी तालियां पीट रहे हैं , वह जहरीमल घोड़े पर सवार होकर घोषणा कर रहे है… ‘चलो , सब नगर के बाहर। नगर के बाहर कुएँ पर सभी को एक खेल दिखाया जाएगा। वह भी मुफ्त में।…

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किसी का मजा, किसी को सजा – भाग 6

सोमदेवा- मैं तो रोजाना मंदिर में जाकर भगवान को उपालंभ देती हुई कहती हूं … ‘भगवान , तूने हमें ऐसा कुरूप पुत्र देकर दुःखी किया… ठीक है । हम पुत्र का भलीभांति लालन – पालन करेंगे । पर यह राजकुमार और उसके मित्र उस पर जो अत्याचार गुजारते हैं… उसे तो तुम रोक सकते हो । मेरे इस बेटे की…

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