Archivers

संबंध जन्म जन्म का – भाग 6

वैर की आग धधक उठी होगी,बदला लेने के लिए तड़प रहा होगा !’ यह बात तुम्हारी जंचती है | चुकी धर्मशास्त्रो में ऐसी बाते पड़ने को मिलती है !मेने पड़ा भी है !’ ‘और फिर इस व्दीप पर इसका अधिकार होगा |’ उसको इजाजत के बगेर जो कोई भी इस व्दीप पर आने की कोशिश करता होगा उसे वह मर…

Read More
संबंध जन्म जन्म का – भाग 5

दुग्धपान का समय हो चुका है….देवी आपकी प्रतीक्षा के रही है |’ तब अमर विचानिद्रा में से जगा | जल्दी से भोजन कक्ष में पंहुचा |सुर सुंदरी उसकी राह देखती बैठी थी | ‘स्वामिन , क्या कोई व्यापारी आ गया था क्या ?’सुंदरी ने हस्ते हुए पूछा ! ‘व्यापारी लोग आने चालू होगे तब तो मुझे दूध वही पर मागवा…

Read More
संबंध जन्म जन्म का – भाग 4

स्नान वगेरह से निव्रत होकर अमरकुमार मुख्य नाविक से मिला | बाहर जहाजों के बारे में जानकारी ली | समुद्र के हवामान की बाते की | चंपा नगरी से कितना दूर आये….यह भी जान लिया | ‘कुमार सेठ, अपने पास आज का दिन निकल जाय उतना तो मीठा पानी हें ,….पर कल अपन को किसी व्दीपपर रुकना होगा पानी भरने…

Read More
संबंध जन्म जन्म का – भाग 3

‘राग ~द्वेष के अस्तित्व में भी संबंध तो टिकेगा न?’ संबध अखंड नहीं रहेगा….संसार के सभी सम्बन्ध अनित्य है |’ ‘एक जनम में संबंद अखंड व अक्षुण्ण रहने की बाते शास्त्रों में भी तो आती है न? अरे, नौ नौ जन्म तक संबंध अखंड रहने के उदाहरण मेरे पास मोजूद है |’ ‘वह तो मै भी जनता हुँ !’ ‘तब…

Read More
संबंध जन्म जन्म का – भाग 2

सुन्दरी और अमरकुमार दोनो अपने शयनकक्ष में आये। परिचरिक ने कक्ष में दिये जलाकर रख दिये थे। कपडे बदलकर सुन्दरी अमर के सामने जमीन पर बेठी थी | अमरकुमार सुन्दरी के चेहरे पर निगाह बिछाये बेठा था | सुंदरी शर्माने लगी…. उसने पूछा: ‘क्यों खामोश हो? ’ ‘सोच रहा हु !’ ‘ओह ! सोच रहे हो या देख रहे हो?’…

Read More

Warning: Use of undefined constant custom_pagination - assumed 'custom_pagination' (this will throw an Error in a future version of PHP) in /home/customer/www/voiceofjains.in/public_html/wp-content/themes/voiceofjains/taxonomy-jain_katha_category.php on line 143

Archivers