Archivers

जीवन की सफलता और सार्थकता के लिए उत्साह अति आवश्यक है

जीवन की सफलता और सार्थकता के लिए उत्साह अति आवश्यक है। कोई भी कार्य करने से पहले मन में उत्साह होना चाहिए, तो उसका परिणाम भी सुंदर ही आता है। उत्साह अपने जीवन को मधुरता से भर देता है। उत्साह प्रगति का मार्ग है। उत्साह एक संत भी है, उत्साह विश्वास भी है, उत्साह आत्मविश्वास है, और उत्साह जीवन का सच्चा श्वास भी है।

उत्साह सामान्य कार्य को भी तेजस्विता से भर देता है।

मनहर भाई अति उत्साही और उल्लास वाले व्यक्ति थे, उनकी 55 साल की उम्र थी, पर उनका काम 25 साल के युवा को भी शर्म आजाए ऐसे महेनती और सेवाभावी थे।

एक दिन मनहर भैया बस में चड़ रहे थे और चढ़ते-चढ़ते उनका पैर फिसल गया, वह गिर गये, उनकी बायीं करवट अकड़ गई और उनको पैरालिसिस हो गया। मनहर भाई हलन-चलन भी नहीं कर पाते थे। सभी प्रकार की दवाई करवाई पर कुछ फर्क नहीं लगा। अलग-अलग स्पेशलिस्ट को दिखाया तो भी फर्क नहीं लगा। सबने मना कर दिया कि अब अच्छा होना मुश्किल है, सब जगह से रास्ते बंद हो गए। डॉक्टर ने बोल दिया अब पूरी जिंदगी आपको bed में निकालनी है। आप तो आप प्रभु का नाम लो और समय बिताओ। परिवार वाले यह सुनकर टूट चुके थे। सब का उत्साह खत्म हो गया था।

परिवार में मनहर भाई कमाने वाले अकेले थे। उनसे ही घर चल रहा था। बच्चे तो अभी
.छोटे-छोटे थे आठवीं दसवीं में ही पढ़ रहे थे, ऐसी परिस्थिति में इनकी पत्नी कैसे घर को चलाएं, यह प्रश्न था? वह भी ज्यादा अनुभवी नहीं थे, कि उनको नौकरी मिल जाए।

ऐसे वक्त में उत्साह को टीकाना बहुत कठिन लगता है। बहुत दिनों की दौड़ा-दौड़ी और डॉक्टर का आखिरी फैसला सुनकर पत्नी की हिम्मत टूटने लगी, किंतु मनहर भाई का उत्साह बिल्कुल कम नहीं हुआ, उन्होंने पत्नी को आश्वासन दिया “अरे, आप टेंशन क्यों करते हो, डॉ. तो कहते रहते हैं, आप चिंता मत करो” भगवान ने एक हाथ और एक पैर छीन लिया है, पर काम करने के लिए दूसरा हाथ तो है ना?

किसने ऐसा कहा कि पेरेलिसिस अच्छा नहीं हो सकता? मैं भी काम करूंगा और एक दिन में ठीक हो जाऊंगा। मैं कसरत भी करूंगा। मैं जरूर ठीक होकर दिखाऊंगा। यह दिन प्रभु की भक्ति करने के के लिए थोड़ी है? मन में प्रभु पर विश्वास रखकर उत्साह से काम करने के हैं।

मनहर भाई ने उत्साह से काम करना चालू करा। लैपटॉप आदि घर से उन्होंने व्यापार काम करना चालू किया। उनकी पत्नी का सहारा लेकर धीरे-धीरे धंधे को सेट किया। 2 साल में तो अच्छी इनकम खड़ी कर दी, उनका उत्साह और उल्लास के कारण उनकी जो बीमारी थी वह खत्म होने आयी। दो साल में तो वह 80% अच्छे हो गये, दोनों हाथ ठीक हो गए। वह प्रॉपर बोलने भी लगे। शरीर औए धंधा दोनों काम करने लगे उसका कारण सिर्फ उत्साह और उल्लास ही था। उनके अंदर जीने का और जीतने का उत्साह भरा हुआ था। उत्साह अनंत शक्तियों को गतिशील बनाता है। चारों दिशाओं से दरवाजे बंद भी हो जाए तो भी अपने उत्साह को कम मत होने देना।

अपनी प्रॉब्लम्स को उत्साह में ट्रांसफर कर दीजिए तो अपनी सब प्रॉब्लम खत्म हो जाएगी।

मुस्किल, आफत और जरूरत
June 9, 2020

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Archivers