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मुस्किल, आफत और जरूरत

मुस्किल, आफत और जरूरत के समय में सब मुंह फेर लेते हैं, पर तब कोई नि:स्वार्थ भाव से मदद करें उसे उपकार कहते हैं। उपकार ही मानव का धर्म है। जो बिना स्वार्थ से दूसरों की मदद करते हैं, वह उपकार है। जिसने-जिसने अपने उपर उपकार करा हो उसे भगवान समझना चाहिए। एक बार की घटना है।

डॉक्टर जनक भाई रावल की बहुत बड़ी अस्पताल थी। एक दिन एक गरीब मजदूर दौड़ते हुए आया और उन्होंने बताया कि डॉ साहब मैं यहां पास की झोपड़ी में रहता हूं, मेरेे बेटे की हालत बहुत बिगड़ी हुई है, तेज बुखार आ रहा है वो कुछ बोल नहीं पा रहा है। प्लीज आप दवा दीजिए मैं आपके उपकार को जीवन भर नहीं भूल पाऊंगा। वह मजदूर बाप डॉक्टर के चरणों में गिर पड़ा। डॉक्टर को बचपन से ही गरीब और मजदूरों पर नफरत थी। उन्होंने ऊपर देखा उनको हुआ कि यह क्या दवाई का पैसा दे सकेगा? इसलिए उन्होंने बोला कि भैया आप इसे सरकारी अस्पताल में ले जाइए।

मजदूर ने कहा कि मैं वहां पर भी लेकर गया पर कुछ फर्क नहीं लगा और मेरे पास पैसा भी नहीं है, मैं दवा कैसे लाऊंगा? इसीलिए मैं आपके पास आया हूं, प्लीज आप मेरे पर उपकार करो, बेटे को दवा दे दो।

डॉक्टर को बहुत गुस्सा आया पर वह कुछ बोले नहीं। अगर वह गुस्सा करे तो उनकी इंप्रेशन डाउन हो जाती है। इसीलिए उन्होंने ‘रामजी’ को बाहर कंपाउंडर के पास भेजा। डॉक्टर ने उस लड़के को हाथ भी नहीं लगाया और बाहर निकाल दिया।

रामजी बाहर गया इतने में कंपाउंडर को फोन लगाया और चिड़ गया ‘कनुड़ा’ कहां मर गया था? एक भिखारी अंदर घुसा गया था, क्या आपको पता भी नहीं चला, आप क्या ध्यान रखते हो दूसरी बार ऐसा नहीं होना चाहिए।

एक काम करो इस गरीब को मुफ्त में आई हुई जो भी दवाई है, उसे थोड़ी सी दे दो। कंपाउंडर टिकड़ी दे दी। और मजदूर की किस्मत अच्छी थी, लड़के का स्वास्थ अच्छा हो गया। जब किस्मत साथ देती है तो बिगड़ा हुआ काम भी सुधर जाता है। मजदूर तो डॉ. के उपकार को नहीं भूल पाया, वो 3-4 वक्त अस्पताल में मिलने गया पर कंपाउंडर ने उसे डॉक्टर को मिलने ही नहीं दिया, वह रोज एक ही विचार करता था डॉक्टर का उपकार कैसे चुकाऊं। जो सच्चे दिल से सोचता है, उसे रास्ता भी मिल जाता है।

एक दिन डॉक्टर अपने साथ 7 साल के बेटे को क्लीनिक पर लाया था। लड़का खेल रहा था। खेलते-खेलते वह बाहर निकल गया। डॉक्टर को पेशेंट देखने में ध्यान नहीं रहा। बाहर बारिश भी आ रही थी, रास्ते में पानी भरा हुआ था, अचानक ही लड़का एक नाली में गिर गया, उसी वक्त वह मजदूर वहां से जा रहा था, उसने देखा और तुरंत ही उस लड़के को बाहर निकाला।

डॉक्टर और दूसरे लोग ढूंढते-ढूंढते वहां पर आए, इस घटना को समझते ही डॉ रामजी के चरणों में गिर पड़ा, भैया, आपने मेरे बेटे का जीवन बचाया है, मैं आपके उपकार को जीवन भर नहीं भूल पाऊंगा, बताइए मैं आपको इसके बदले में क्या दूं। मैं आपके उपकार नहीं उतार सकूंगा.. डॉक्टर रोने लगे….।

मजदूर ने कहा आपका उपकार मेरे से भी बड़ा है, आपने तो मेरे बेटे की जान बचाई है, उस समय डॉक्टर को रामजी की घटना याद आ गई कि मैंने तो कोई भी उपकार नहीं किया।

अब वो राम जी के उपकार के नीचे खुद को दबा हुआ महसूस कर रहे थे। यह उपकार का बदला कैसे चुकाना, इसीलिए दूसरे ही दिन क्लीनिक के बाहर बोर्ड लगा दिया।-

सब गरीब दर्दियो का मुफ्त में इलाज किया जाएगा।

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