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बाहुबली

भरत चक्रवर्ती के छोटे भाई। भगवान ऋषभदेव ने उनको तक्षशिला का राज्य दिया था। उनका बाहुबल और साधारण था, इस कारण चक्रवर्ती की आज्ञा नहीं मानते थे। इससे भरत चक्रवर्ती ने उनपर चढ़ाई की और और दृष्टियुद्ध, वागयुद्ध और दंडयुद्ध किया, जिसमें वे हार गए। अंत में भरत ने मुष्ठीप्रहार किया, उससे बाहुबली कमर तक जमीन में घुस गए। उनका प्रत्युत्तर देने के लिए बाहुबली ने भी मुट्ठी उठाई। यह मुट्ठी भरत पर पड़ी होती तो उनका प्राण निकल जाता, परंतु इसी समय बाहुबल की विचारधारा पलट गई की नश्वर राज्य के लिए बड़े भाई की हत्या करने उचित नहीं है, इससे मुठ्ठी वापस नहीं उतारते हुए उससे मस्तक के केशो को लोच किया और भगवान ऋषभदेव के पास जाने को तत्पर हुए, किंतु उसी समय विचार आया कि मुझसे छोटे 98 भाई दीक्षा लेकर केवल ज्ञान को प्राप्त हुए, वे वहां उपस्थित है उनको मुझे वंदन करना पड़ेगा, अतः मै भी केवल ज्ञान प्राप्त करके ही वहाँ जाऊं। इस विचार से वही कार्योत्सर्ग में स्थिर रहे। 1 वर्ष तक उपग्रह करने पर भी उनको केवल ज्ञान नहीं हुआ, तब प्रभु ने उनको प्रतिबोध देने के लिए ब्राह्मी और सुंदरि नामकी साध्वियों को भेजा, जो कि संसारी की अवस्था में उनकी बहिने थी। उनने आकर कहा है भाई! ‘हाथी की पीठ से उतरो, हाथी पर चढ़ते हुए केवलज्ञान नहीं होता’ यह सुनकर बाहुबली चौक पड़े। यह बात अभिमान रूपी हाथी की थी। अंत में भावना शुद्ध होने से उन्हें वहीं केवल ज्ञान प्राप्त हुआ। तदनन्तर वे श्री ऋषभदेव भगवान के पास गए और उनको वंदन करके केवलियों की परिषद में विराजित हुए।

चंदनबाला
April 18, 2020
मुस्किल, आफत और जरूरत
June 9, 2020

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