Ideas To Change Your Life

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दुःख मे सुख खोजने की कला

मानव का मूलभूत स्वभाव दुखी रहने का है । मानव को दुःख के लिए रोने मे भी सुखी होने से ज्यादा मजा आता है । थोडे दिनो तक लगातार काम करले मानव तो उसको लगता है छुट्टी हो जाए तो ज्यादा अच्छा क्योंकि ज्यादा काम करने के कारण भी वो दुःखी हो जाता है। और जब उसको holiday मिलता है…

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लालच बुरी बला है

एक शहर में एक आदमी रहता था। वह बहुत ही लालची था। उसने सुन रखा था की अगर संतो और साधुओं की सेवा करे तो बहुत ज्यादा धन प्राप्त होता है। यह सोच कर उसने साधू–संतो की सेवा करनी प्रारम्भ कर दी। एक बार उसके घर बड़े ही चमत्कारी संत आये। उन्होंने उसकी सेवा से प्रसन्न होकर उसे चार दीये…

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एक प्रसिद्ध कैंसर स्पैश्लिस्ट था|

एक प्रसिद्ध कैंसर स्पैश्लिस्ट था| नाम था मार्क, एक बार किसी सम्मेलन में भाग लेने लिए किसी दूर के शहर जा रहे थे। वहां उनको उनकी नई मैडिकल रिसर्च के महान कार्य  के लिए पुरुस्कृत किया जाना था। वे बड़े उत्साहित थे, व जल्दी से जल्दी वहां पहुंचना चाहते थे। उन्होंने इस शोध के लिए बहुत मेहनत की थी। बड़ा…

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जीवन का हेतु क्या है ?

“जीवन का हेतु क्या है ?” एक मनोविज्ञान की कक्षा में प्रोफेसर ने छात्रो से पूछा की जीवन का सच्चा हेतु क्या है? सब विद्यार्थी सोचने लग गये। सभी के मन में उत्तर प्रगट हुए। पर कोई भी बोला नहीं। सभी प्रोफेसर की ओर देख रहे थे। प्रोफेसर जवाब देने के लिए खड़े हुए और बोले आप सभी के मन…

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एक जैन परिवार के घर का द्रश्य

एक जैन परिवार के घर का द्रश्य::::: 1995, राजस्थान(उदयपुर )का एक गांव:::::: घर के सभी सदस्य सुबह के 6 बजे उठ गए, बच्चे बड़ो के पाव छु रहे है । बड़े नहा धो कर स्वच्छ धोती दुपट्टा ओढ़े गांव के कोने में बने कुँए से पानी भर कर मंदिर जी में अभिषेक पूजन के लिए ले जा रहे है। हर…

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जीवन सागर है

हम सब जीवन जीते है। परन्तु कभी भी हमने इस जीवन के अर्थ को नहीं समझा नहीं जानने की कोशिश करी। यह प्रश्न एक शिष्य के मन में उत्तपन्न हो गया।और इसके समाधान के लिए पहुंचा गुरुदेव क पास। गुरु देव से बोला की ये जीवन एक दम विशाल है सागर की तरह। इसकी तुलना सागर के साथ करे तो…

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आज हम 21 वी सदी मे जीवन यापन कर रहे है

आज हम 21 वी सदी मे जीवन यापन कर रहे है । इस 21 वी सदी मे हम ब्रान्डेड (Brand) की और आकर्षित हो चुके है। हमे आज के समय मे हर चीज Branded ही चाहिए । कपडे मे रेमन्ड(Raymond), घड़ी मे रोलक्स( Rolex), मोबाइल मे Apple, जूतो मे Nike, साबून मे Dove, होटल मे 7☆ परन्तु क्या हम संसार…

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प्रेक्टिस मेक मेन परफेक्ट

आज के मानव को सफलता चाहिये वो भी बिना मेहनत के या तो कम मेहनत फटाफट सफलता का स्वाद चखना चाहता है और उसके लिए तल पापड हो जाता है । परंतु याद रखना परिक्षा हो या जीवन सफलता कभी भी त्वरित नही मिलती है । सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेक्टिस की आवश्यकता होती है । तन तोड़ परिश्रम…

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जहाँ अर्पण है जहाँ समर्पण है जहाँ सब आलोचना का तर्पण है वही दाम्पत्य है

आज हम 21 वी सदी मे जीवन यापन कर रहे है । हमारी अपेक्षाए निरन्तर बढ रही है । हम हमारी संस्कृति से विमुख हो गये है । हम धर्म को तो भूल ही रहे होंगे परन्तु हमारी संस्कृति ने जो संबंध हमे दिये है जिस पर हमारे जीवन का आधार है जिस पर कई सुंदर कल्पना की सृष्टि हम…

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मानव की सेवा वो भगवान की सेवा है

सेवा मानव का धर्म है। सेवा मानव का सच्चा कर्म है। सेवा मानव का दयालु मन है। सेवा मानव का मनन है। सेवा दुसरो के लिए घिसाने वाला तन है। सेवा संस्कार है। सेवा पिडीत मानव की पुकार है। सेवा निराधार की आधार है। सेवा अहं का आकार है। सेवा होती है वहा प्रेम का बरसात अनराधार है। और सेवा…

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