Ideas To Change Your Life

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GOCHARI__गोचरी

साधू-साध्वी जो अपने जीवन निर्वाह के लिए शुद्ध आहार–पानी ग्रहण करते है, उसे गोचरी कहते है। पंच महाव्रतधारी साधु-साध्वियों को श्रावक निर्दोष आहार–पानी बहरावें, उसे सुपात्र दान कहते है। सुपात्र दान देने से कर्मो की महान् निर्जरा होती है! सुपात्र दान देने के लिये निम्न बातों का ध्यान रखना आवशयक है— असूझता व्यक्ति दरवाजा ना खोले यानि कच्चा पानी, हरी…

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(((#एक_अनोखा__तलाक#))))……जरूर पढ़े

हुआ यों कि पति ने पत्नी को किसी बात पर तीन थप्पड़ जड़ दिए, पत्नी ने इसके जवाब में अपना सैंडिल पति की तरफ़ फेंका, सैंडिल का एक सिरा पति के सिर को छूता हुआ निकल गया। मामला रफा-दफा हो भी जाता, लेकिन पति ने इसे अपनी तौहिनी समझी, रिश्तेदारों ने मामला और पेचीदा बना दिया, न सिर्फ़ पेचीदा बल्कि…

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*कभी न करे लोभ*

बहुत समय पहले की बात है। एक राजा ने अपनी सेना सहित किसी नगर के बाहर पड़ाव डाला। वहाँ पेड़ पर बैठा एक बालक गौर से उनकी तमाम गतिविधियां देख रहा था। उसने सोचा की मै कई दिनों से भूखा हूं किन्तु अब लगता है कि मुझे भरपेट खाने को मिलेगा। यह सोचकर वह मन-ही-मन हर्षित हुआ। अब उससे रहा…

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मांस का मूल्य

मित्रों मांस का मूल्य आप भी जानिए मगध सम्राट् बिंन्दुसार ने एक बार अपनी राज्य सभा में पूछा :- देश की खाद्य समस्या को सुलझाने के लिए सबसे सस्ती वस्तु क्या है ? मंत्री परिषद् तथा अन्य सदस्य सोचमें पड़ गये। चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा आद तो बहुत श्रम बाद मिलते हैं और वह भी तब, जब प्रकृति का प्रकोप…

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“विचार अपवित्र बनते है तब आचार भी अपवित्र बन जाता है चलो विचारो की care करे”

विचार वह मन में उढते तरंग जैसे है तरंग दीपक की ज्योति जैसी भी होती है और प्राण को निकाल दे ऐसी बिजली जैसी भी होती है। मन में विचार उत्पन्न होना , ये एक फिक्स बात है। परन्तु विचार कैसे होंगे उसका आधार मानव पर ही है। मानव अच्छे विचार भी कर सकता है और बुरे विचार भी कर…

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“अपमान के साथ निकालते हो घर में से आज.. आँसू बन कर आपकी आँखों में आएंगे..”

घटना आज से 45 yrs पुराणी है। अहमदाबाद की प्रख्यात मेडिकल कॉलेज में से परीक्षा देकर युवक- युवतिया बहार निकल रहे थे। एक अत्यंत साधारण घर का तेजस्वी युवक पैदल चल रहा था। कॉलेज के मैन गेट में से बहार निकल रहा था। तभी एक इम्पोर्टेड कार ओवरटेक करती है। गाड़ी रूकती है। तेजस्वी युवक तपन उस गाड़ी में बैठ…

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“इस प्रधानमंत्री जैसा चरित्र सबका हो जाए तो देश चरित्रवान बन जाएगा”

मानव कि सम्पत्ति चली जाए तो भी वह कुछ भी खोता नही है कारण वह उसे पुनः प्राप्त कर सकता है, मानव कि स्वस्थाता को हानि पहुंचा तो भी वह एक बार उसे पुनः पा सकता है, परंतु मानव एक बार अगर चरित्र को खो दे तो यह समझना की उसने जीवन में सब कुछ खो दिया है। चरित्र एक…

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आर्द्रकुमार का दृष्टांत

आर्द्रकुमार पूर्व भव में सोमादित्य नामक ब्राहमण था। उसकी पत्नी का नाम बंधुमती था। एक बार वैराग्य भाव में आकर उसने अपनी पत्नी के साथ आचार्यदेव श्री सुस्थितसूरीश्वरजी म.सा. के पास दीक्षा ग्रहण की। उसके पश्चात स्वयं की (भुतपूर्व पत्नी) साध्वी को देखकर पूर्व की काम-क्रीड़ा का स्मरण हो गया। अहो ! वास्तव में काम वासना कितनी बलवान है? साधुपना…

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बंधुमती साध्वीजी

बंधुमती साध्वीजी को यह पता चला कि मुनिराजश्री मेरे निमित्त से रोज पाप बांधते हैं । अतः अनशन कर जीवन का अंत कर लूं । जिससे मेरे निमित्त से उनको पाप तो नहीं बंधेगा।इस प्रकार भाव दया का चिंतन करके गुरुदेव की अनुमति लेकर अनशन करके शुभ भाव में काल कर वह साध्वीजी देवलोक में गई। महान आत्मायें दूसरों को…

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माँ का उपकार

एक अमीर था। वह अपनी माँ को बहुत प्यार करता था। एक दिन वह बैठकर सोच रहा था *मेरी माँ ने मुझे पालने में बहुत तकलीफे उठाई। बदले में मुझे माँ के लिए कुछ करना चाहिए। तभी मै अपने ऊपर से माँ का कर्जा उत्तर सकता हूँ।* उसने कई बोरे अनाज, दाल, चीनी, बहुत-सा सोना और रुपये इकट्ठे किये। एक…

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